सुन बे! “कोरोना” (व्यंग्यात्मक कविता)


सुन बे! “ कोरोना ” तूने जो, दुनिया मे तबाही मचाई है
क्या चीन वालो ने तुझे, स्ट्राबूस्ट की दवाई पियाली हैं ।
ना रुक रहा, ना थम रहा, तूने ऐसी दौड़ लगाई है
क्या तूने हर फ्लाइट में, बुकिंग फ्री कराई है।
अब तो तेरे पापा (चीन) भी, तुझसे परेशान हुए
ढूंढ़ रहे इलाज तेरा, पर ना अभी कामयाब हुए
गलती कि तूने बच्चू! जो आ टपका हिन्दुस्तान में।
जान बचाना है अगर तुझको, तो घुस जा किसी मान में।
हम भारतीय है ऊपर से, ठेठ देहाती हमको कहते
तेरे जैसे कितनो को तो हम, सुर्ती के साथ रगड़ देते
इक तो तू है सुक्ष्मदर्शी , दिखता नही आँखों से
वार करता छुप-छुप के, बच्चों और बुढापो पे।
नही पता क्या तुझको बेटा! ये वही हिन्दुस्तान है
हार मानकर भागा यहाँ से, जो सिकंदर महान है
अब तू कितना टिक पायेगा प्यारे! 2
तूतो वैसे भी चाइना का माल है।
✍️ कुमारभास्कर
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